भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 | MCQs | Paper - 2 |

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 | MCQs | Paper - 2 |

Free Online Judiciary Coaching Classes Free Online Judiciary Coaching Classes

Download PDF

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988

THE PREVENTION OF CORRUPTION ACT, 1988

 

1. क्या कोई व्यक्ति पहली बार अपराध करने के बाद इस धारा के तहत दंडित होगा?

a. हाँ, किसी भी अपराध पर

b. नहीं, केवल पहले से सिद्धदोष ठहराए गए व्यक्ति पर

c. हाँ, यदि सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग हुआ हो

d. केवल लोक सेवक पर

 

2. धारा 15 किस प्रकार के अपराध को कवर करती है?

a. प्रयत्न के लिये दंड

b. कोई भी अपराध

c. केवल सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग

d. केवल आभ्यासिक अपराध

 

3. धारा 15 का संबंध किस धारा से है?

a. धारा 12

b. धारा 13(1)()

c. धारा 14

d. धारा 16

 

4. धारा 15 के तहत प्रयत्न करने वाला कौन दंडनीय होगा?

a. कोई भी व्यक्ति

b. केवल लोक सेवक जो धारा 13(1)() में निर्दिष्ट अपराध करने का प्रयत्न करता है

c. केवल पहले से अपराधी व्यक्ति

d. केवल सरकारी अधिकारी

 

5. धारा 15 के तहत कारावास की अवधि क्या है?

a. 1 वर्ष से 3 वर्ष

b. 2 वर्ष से 5 वर्ष और जुर्माने से भी, दण्डनीय होगा

c. 3 वर्ष से 7 वर्ष

d. 4 वर्ष से 10 वर्ष

 

6. धारा 16 किससे संबंधित है?

a. अपराधियों के लिए कारावास की अवधि

b. जुर्माना निर्धारित करने के लिए न्यायालय द्वारा ध्यान में रखी जाने वाली बातें

c. अपराध के लिए प्रयत्न

d. आभ्यासिक अपराधियों का दंड

 

7. धारा 16 के अनुसार जुर्माना निर्धारित करते समय न्यायालय क्या देखेगा?

a. केवल सरकारी संपत्ति का मूल्य

b. अपराध से अभियुक्त द्वारा प्राप्त राशि या संपत्ति का मूल्य

c. केवल अपराध की गंभीरता

d. केवल अभियुक्त की आय

 

8. यदि दोषसिद्धि धारा 13(1)() में निर्दिष्ट अपराध के लिए हो, तो न्यायालय जुर्माना निर्धारित करते समय क्या ध्यान में रखेगा?

a. अभियुक्त की आय का केवल अनुमान

b. उस धन संबंधी साधन या संपत्ति का मूल्य जिसका अभियुक्त समाधानप्रद लेखा-जोखा देने में असमर्थ है

c. केवल सरकारी खजाने की सुरक्षा

d. केवल अभियुक्त का वेतन

 

9. धारा 16 के अनुसार जुर्माना किन धाराओं के तहत लगाए गए अपराधों में ध्यान में रखा जाएगा?

a. केवल धारा 7 और धारा 8

b. धारा 7, 8, 9, 10, 11, 13(2), 14, और 15

c. केवल धारा 13(1)

d. केवल धारा 14 और 15

 

10. न्यायालय जुर्माना तय करते समय क्या मान्यता देगा?

a. केवल अपराध की गंभीरता

b. अभियुक्त द्वारा अभिप्राप्त राशि या संपत्ति का मूल्य

c. केवल अभियुक्त के वेतन की राशि

d. केवल सरकारी लाभ

 

11. धारा 16 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

a. अभियुक्त को केवल कारावास देना

b. अपराध से लाभ उठाने वाले अभियुक्त को न्यायोचित वित्तीय दंड देना

c. केवल सरकारी संपत्ति की सुरक्षा

d. केवल मानसिक सजा देना

 

12. यदि अभियुक्त अपराध करके कोई संपत्ति प्राप्त करता है, तो न्यायालय जुर्माना तय करते समय उस संपत्ति को:

a. नजरअंदाज कर सकता है

b. ध्यान में रखेगा

c. केवल अनुमानित मूल्य के आधार पर

d. केवल सरकारी खजाने के हिसाब से

 

13. धारा 17 किस विषय से संबंधित है?

a. जुर्माने की राशि

b. अन्वेषण करने के लिए प्राधिकृत व्यक्ति

c. आभ्यासिक अपराधियों का दंड

d. अपराध के प्रयत्न पर दंड

 

14. दिल्ली में किस अधिकारी को अन्वेषण करने का अधिकार है?

a. सहायक पुलिस आयुक्त

b. पुलिस निरीक्षक

c. उप-पुलिस अधीक्षक

d. किसी भी पुलिस अधिकारी

 

15. मुंबई, कलकत्ता, मद्रास और अहमदाबाद महानगरीय क्षेत्रों में किस अधिकारी को अन्वेषण करने का अधिकार है?

a. पुलिस निरीक्षक

b. सहायक पुलिस आयुक्त

c. उप-पुलिस अधीक्षक

d. राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत कोई भी अधिकारी

 

16. अन्यत्र (असंगठित क्षेत्र) किस अधिकारी को अन्वेषण करने का अधिकार है?

a. सहायक पुलिस आयुक्त

b. पुलिस निरीक्षक

c. उप-पुलिस अधीक्षक या समतुल्य रैंक का अधिकारी

d. कोई भी पुलिस अधिकारी

 

17. क्या पुलिस अधिकारी महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना अन्वेषण कर सकता है?

a. हाँ, किसी भी अपराध के लिए

b. नहीं, केवल निर्दिष्ट रैंक वाले अधिकारी बिना आदेश के अन्वेषण नहीं कर सकते

c. केवल सहायक पुलिस आयुक्त कर सकते हैं

d. केवल सामान्य आदेश मिलने पर

 

18. यदि राज्य सरकार किसी अधिकारी को विशेष आदेश द्वारा प्राधिकृत करती है, तो वह क्या कर सकता है?

a. बिना मजिस्ट्रेट आदेश के अन्वेषण कर सकता है

b. केवल दस्तावेजों की जांच कर सकता है

c. केवल गिरफ्तारी वारंट जारी कर सकता है

d. केवल पुलिस निरीक्षक के आदेश का पालन करेगा

 

19. धारा 13(1)() में निर्दिष्ट अपराध का अन्वेषण कौन करेगा?

a. कोई भी पुलिस अधिकारी

b. केवल पुलिस अधीक्षक या उससे ऊपर रैंक का अधिकारी

c. केवल सहायक पुलिस आयुक्त

d. उप-पुलिस अधीक्षक

 

20. क्या पुलिस निरीक्षक से नीचे के अधिकारी धारा 13(1)() के अपराध का अन्वेषण कर सकते हैं?

a. हाँ, बिना किसी आदेश के

b. नहीं, केवल पुलिस अधीक्षक या उससे ऊपर रैंक के आदेश पर

c. हाँ, राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत होने पर भी

d. केवल महानगर मजिस्ट्रेट के आदेश से

 

21. धारा 17 के अनुसार गिरफ्तारी वारंट के बिना अन्वेषण कौन कर सकता है?

a. कोई भी पुलिस अधिकारी

b. केवल राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत अधिकारी जो पुलिस निरीक्षक या उससे ऊपर रैंक का हो

c. केवल सहायक पुलिस आयुक्त

d. केवल उप-पुलिस अधीक्षक

 

22. धारा 17 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

a. पुलिस अधिकारियों की अन्वेषण क्षमता बढ़ाना

b. केवल गिरफ्तारी वारंट जारी करना

c. अन्वेषण के लिए प्राधिकृत अधिकारियों और उनके आदेशों को स्पष्ट करना

d. जुर्माने की राशि निर्धारित करना

 

23. लोक सेवक द्वारा उसके शासकीय कृत्यों या कर्तव्यों के निर्वहन में की गई सिफारिशों या लिए गए विनिश्चय के संबंध में अपराधों की जांच या पूछताछ या अन्वेषण, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 17

b. धारा 17()

c. धारा 18

d. धारा 18()

 

24. धारा 17() किस प्रकार के अपराध की जांच/पूछताछ को नियंत्रित करती है?

a. सामान्य अपराध

b. लोक सेवक द्वारा उसके शासकीय कृत्यों या कर्तव्यों में की गई सिफारिशों या लिए गए विनिश्चय से संबंधित अपराध

c. केवल संपत्ति से संबंधित अपराध

d. केवल आभ्यासिक अपराध

 

25. क्या कोई पुलिस अधिकारी बिना पूर्वानुमोदन के इस प्रकार के अपराध की जांच/पूछताछ/अन्वेषण कर सकता है?

a. हाँ, किसी भी स्थिति में

b. नहीं, केवल अनुमोदन के बाद

c. केवल गंभीर मामलों में

d. केवल सरकारी संपत्ति से जुड़े मामलों में

 

26. यदि अपराध उस समय संघ के कार्यों के संबंध में नियोजित व्यक्ति द्वारा किया गया हो, तो अनुमोदन किससे लिया जाएगा?

a. राज्य सरकार से

b. केंद्र सरकार से

c. उप-पुलिस अधीक्षक से

d. महानगर मजिस्ट्रेट से

 

27. यदि अपराध उस समय किसी राज्य के कार्यों के संबंध में नियोजित व्यक्ति द्वारा किया गया हो, तो अनुमोदन किससे लिया जाएगा?

a. राज्य सरकार से

b. केंद्र सरकार से

c. सहायक पुलिस आयुक्त से

d. पुलिस निरीक्षक से

 

28. किसी अन्य व्यक्ति के मामले में अपराध की जांच/पूछताछ/अन्वेषण के लिए अनुमोदन किससे लिया जाएगा?

a. राज्य सरकार से

b. केंद्र सरकार से

c. उसे उसके पद से हटाने के लिए सक्षम प्राधिकारी से

d. उप-पुलिस अधीक्षक से

 

29. क्या असम्यक् लाभ लेने या लेने के प्रयास के आरोप में घटनास्थल पर गिरफ्तार करने के लिए अनुमोदन आवश्यक है?

a. हाँ, हमेशा

b. नहीं, घटनास्थल पर गिरफ्तारी के लिए अनुमोदन आवश्यक नहीं है

c. केवल केंद्र सरकार के आदेश से

d. केवल राज्य सरकार के आदेश से

 

30. अनुमोदन देने वाले संबद्ध प्राधिकारी को अपनी विनिश्चय की सूचना कितनी अवधि के भीतर देनी होगी?

a. एक माह

b. तीन माह

c. छह माह

d. तुरंत

 

31. इस तीन माह की अवधि को किन परिस्थितियों में और बढ़ाया जा सकता है?

a. किसी भी कारण से

b. केवल लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से एक माह के लिए बढ़ाया जा सकता है

c. केवल सरकार के आदेश से

d. केवल पुलिस अधीक्षक की सिफारिश पर

 

32. बैंककारी बहियों के निरीक्षण की शक्ति, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 18

b. धारा 19

c. धारा 20

d. धारा 21

 

33. धारा 18 के अंतर्गत बैंककारी बहियों का निरीक्षण करने का अधिकार किसे प्राप्त है?

a. कोई भी सरकारी कर्मचारी

b. पुलिस अधिकारी, जो धारा 17 के अधीन सशक्त हो

c. बैंक मैनेजर

d. न्यायालय कर्मचारी

 

34. पुलिस अधिकारी बैंक बहियों का निरीक्षण कब कर सकता है?

a. केवल बैंक की लिखित अनुमति पर

b. केवल शिकायतकर्ता की मांग पर

c. जब उसे किसी अपराध के किये जाने का संदेह हो

d. जब बैंक का आंतरिक ऑडिट हो

 

35. पुलिस अधिकारी किन लेखाओं का निरीक्षण कर सकता है?

a. सभी ग्राहकों के लेखे

b. केवल बैंक स्टाफ के खाते

c. केवल उस व्यक्ति के खाते जिस पर अपराध का संदेह हो

d. केवल निदेशक मंडल के खाते

 

36. वह किन्हीं अन्य व्यक्तियों के लेखों का निरीक्षण कब कर सकता है?

a. जब वे बैंक में कार्यरत हों

b. जब उन पर संदिग्ध व्यक्ति हेतु धन धारण करने का संदेह हो

c. जब उन्होंने शिकायत की हो

d. जब बैंक आदेश दे

 

37. निरीक्षण के दौरान पुलिस अधिकारी क्या कर सकता है?

a. बैंक कर्मियों को निलंबित

b. बैंक शाखा सील

c. सुसंगत प्रविष्टियों की प्रमाणित प्रतियां ले सकता है

d. बैंक का सर्वर जब्त

 

38. धारा 18 के अनुसार बैंक की क्या बाध्यता है?

a. सहायता वैकल्पिक है

b. केवल लिखित अनुमति पर सहायता

c. पुलिस अधिकारी को सहायता करना अनिवार्य

d. सहायता तभी जब मामला गंभीर हो

 

39. किस अधिकारी को यह शक्ति प्रयोग करने की अनुमति नहीं है?

a. पुलिस अधीक्षक

b. पुलिस महानिरीक्षक

c. पुलिस अधीक्षक से नीचे का अधिकारी

d. उप महानिरीक्षक

 

40. पुलिस अधीक्षक से नीचे का अधिकारी बैंक बहियों का निरीक्षण कब कर सकता है?

a. जब बैंक मैनेजर चाहे

b. जब शिकायतकर्ता आग्रह करे

c. जब पुलिस अधीक्षक या उससे ऊपर का अधिकारी विशेष रूप से अधिकृत करे

d. कभी नहीं

 

41. “बैंकऔरबैंककार बहीका अर्थ किस अधिनियम से लिया जाता है?

a. बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949

b. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

c. बैंककार बही साक्ष्य अधिनियम, 1891

d. वित्त अधिनियम, 2002

 

42. धारा 18 में अधिकारों का प्रयोग किसी अन्य प्रवृत्त विधि की बाधा के ______ किया जा सकता है।

a. अधीन

b. बावजूद

c. अनुमति से

d. रोक से

 

43. दांडिक विधि संशोधन अध्यादेश, 1944 के उपबंधों का इस अधिनियम के अधीन कुर्की को लागू होना, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 18

b. धारा 18()

c. धारा 19

d. धारा 20

             

44. धारा 18() मुख्य रूप से किस विषय से संबंधित है?

a. बैंक निरीक्षण

b. कुर्की और संपत्ति प्रशासन

c. गिरफ्तारी प्रक्रिया

d. अपील प्रक्रिया

 

45. धारा 18() किस अधिनियम के उपबंधों को लागू करता है?

a. बैंककार बही साक्ष्य अधिनियम, 1891

b. दंड प्रक्रिया संहिता, 1973

c. दांडिक विधि संशोधन अध्यादेश, 1944

d. भारतीय दंड संहिता

 

46. धारा 18()(1) के अनुसार यह उपबंध किस स्थिति में लागू होते हैं?

a. जब धन-शोधन अधिनियम रोक लगाए

b. जब पुलिस चाहे

c. जब न्यायालय आदेश दे

d. जब राज्य सरकार निर्देश दे

 

47. धारा 18() के तहत कौन-से कार्य दांडिक विधि संशोधन अध्यादेश, 1944 के अनुसार संचालित होंगे?

a. गिरफ्तारी

b. कुर्की, संपत्ति प्रशासन और आदेश का निष्पादन

c. मुकदमे की सुनवाई

d. सजा का निर्धारण

 

48. दांडिक विधि संशोधन अध्यादेश, 1944 के उपबंध इस अधिनियम में कैसे लागू होंगे?

a. सटीक रूप से, बिना किसी परिवर्तन

b. जहां तक हो सके

c. केवल राज्य की अनुमति पर

d. केवल उच्च न्यायालय के आदेश पर

 

49. धारा 18() के अनुसार किस प्रकार की संपत्ति पर उपबंध लागू होते हैं?

a. विरासत संपत्ति

b. निजी आवास

c. आपराधिक उपायों द्वारा उपार्जित सम्पत्ति

d. कृषि भूमि

 

50. धारा 18()(2) के अनुसार "जिला न्यायाधीश" शब्द का अर्थ किस रूप में लिया जाएगा?

a. सत्र न्यायाधीश

b. उच्च न्यायालय न्यायाधीश

c. विशेष न्यायाधीश

d. उप-न्यायाधीश

 

51. धारा 18() के अनुसार आदेश किस प्रकार के न्यायाधीश को निर्देशित माना जाएगा?

a. मजिस्ट्रेट

b. निबंधक

c. विशेष न्यायाधीश

d. कार्यपालिका मजिस्ट्रेट

 

52. कुर्की के आदेश का निष्पादन धारा 18() के तहत किन उपबंधों से नियंत्रित होगा?

a. दंड प्रक्रिया संहिता

b. भारतीय साक्ष्य अधिनियम

c. दांडिक विधि संशोधन अध्यादेश, 1944

d. आयकर अधिनियम

 

53. धारा 18() के अनुसार संपत्ति प्रशासन किस अधिनियम के उपबंधों के अनुरूप किया जाएगा?

a. पुलिस अधिनियम

b. वित्तीय नियमावली

c. दांडिक विधि संशोधन अध्यादेश, 1944

d. भारतीय राजस्व संहिता

 

54. अभियोजन के लिए पूर्व मंजूरी का आवश्यक होना, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 19

b. धारा 20

c. धारा 21

d. धारा 22

 

55. धारा 19 के अनुसार न्यायालय किन धाराओं के अपराधों का संज्ञान पूर्व मंजूरी के बिना नहीं ले सकता?

a. धारा 4, 5, 8

b. धारा 7, 11, 13 और 15

c. धारा 16, 17

d. केवल धारा 13

 

56. केंद्र सरकार पूर्व मंजूरी किस लोक सेवक के मामलों में देती है?

a. जिसे केवल राज्य सरकार हटा सकती है

b. जिसे केवल केंद्र सरकार हटाने की शक्ति रखती है

c. निजी कर्मचारी

d. पंचायत कर्मचारी

 

57. राज्य के मामलों के संबंध में कार्यरत और केवल राज्य सरकार द्वारा हटाए जा सकने वाले लोक सेवक के अभियोजन हेतु मंजूरी कौन देगा?

a. केंद्र सरकार

b. राज्य सरकार

c. उच्च न्यायालय

d. पुलिस महानिदेशक

 

58. किसी अन्य (अन्य श्रेणी के) लोक सेवक के लिए मंजूरी कौन देता है?

a. राज्यपाल

b. सक्षम प्राधिकारी (जो पद से हटाने में सक्षम है)

c. सीबीआई निदेशक

d. जिला कलेक्टर

 

59. लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 का क्या प्रभाव है?

a. धारा 19 लागू नहीं होगी

b. धारा 19 की मंजूरी का प्रावधान उसके अधीन अन्यथा उपबंधित मामलों में प्रभावित होगा

c. मंजूरी की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी

d. लोकपाल स्वयं अभियोजन करता है

 

60. निजी व्यक्ति कब केंद्र/राज्य सरकार से मंजूरी हेतु अनुरोध कर सकता है?

a. केवल शिकायत देने पर

b. जब अदालत में परिवाद दायर कर दिया गया हो

c. जब परिवाद दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 203 के अधीन (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 226 के अंतर्गत खारिज हो जाए

d. जब पुलिस एफ आई आर दर्ज करे

 

61. परिवाद खारिज होने पर न्यायालय क्या निर्देश दे सकता है?

a. एफ आई आर दर्ज करने का निर्देश

b. मंजूरी प्राप्त करने की अनुमति

c. पुलिस को निलंबन

d. अभियोजन रोकने का आदेश

 

62. सरकार मंजूरी देने से पहले किसे सुनने का अवसर प्रदान करेगी?

a. परिवादी

b. गवाह

c. संबंधित लोक सेवक

d. जांच अधिकारी

 

63. मंजूरी का निर्णय सामान्यतः कितनी अवधि में दिया जाना चाहिए?

a. 1 माह

b. 2 माह

c. 3 माह

d. 6 माह

 

64. विधिक परामर्श आवश्यक होने पर यह अवधि कितने समय तक बढ़ाई जा सकती है?

a. 15 दिन

b. 1 माह

c. 2 माह

d. 6 माह

 

65. मंजूरी संबंधी त्रुटि, लोप या अनियमितता का क्या प्रभाव होगा?

a. निर्णय स्वतः रद्द हो जाएगा

b. जांच दोबारा होगी

c. केवल तब प्रभावी जब उससे वास्तविक अन्याय हुआ हो

d. अभियोजन शुरू नहीं होगा

 

66. धारा 19 के अनुसारलोक सेवकमें कौन शामिल है?

a. केवल वर्तमान पदाधिकारी

b. केवल सेवानिवृत्त लोक सेवक

c. वह जिसने अपराध के समय पद धारण किया था, चाहे बाद में छोड़ दिया हो

d. केवल आईपीएस अधिकारी

 

67. यदि यह संदेह हो कि मंजूरी कौन देगा, तो किस आधार पर निर्णय होगा?

a. वर्तमान पद

b. उच्चतर सरकार

c. वही प्राधिकारी जो उस समय उसे पद से हटाने में सक्षम था

d. पुलिस रिपोर्ट

 

68. मंजूरी में त्रुटि पर कार्यवाही रोकने के लिए न्यायालय क्या देखेगा?

a. क्या राजनीतिक दबाव है

b. क्या सार्वजनिक हित प्रभावित हुआ

c. क्या ऐसी त्रुटि से वास्तविक अन्याय हुआ

d. क्या आरोपी ने शिकायत की है

 

69. धारा 19(3)() के अनुसार कोर्ट किस कार्यवाही में पुनरीक्षण की शक्ति प्रयोग नहीं कर सकता?

a. अंतिम आदेश पर

b. किसी भी अंतर्वर्ती (interlocutory) आदेश पर

c. अपराध सिद्धि पर

d. शासनादेश पर

 

70. धारा 20 मुख्यतः किससे संबंधित है?

a. जांच की शक्ति

b. जहां लोक सेवक असम्यक् लाभ प्रतिगृहीत करता है वहां उपधारणा

c. दंड

d. अपील

 

71. धारा 20 की उपधारणा कब लागू होती है?

a. जब लोक सेवक पर कोई भी अपराध सिद्ध हो

b. जब धारा 7 या धारा 11 के अपराध में असम्यक लाभ प्रतिगृहीत सिद्ध हो जाए

c. जब लोक सेवक सज़ा पा चुका हो

d. जब जांच लंबित हो

 

72. धारा 20 के तहत उपधारणा किसके विरुद्ध लगाई जाती है?

a. शिकायतकर्ता के विरुद्ध

b. अभियोजन पक्ष के विरुद्ध

c. अभियुक्त लोक सेवक के विरुद्ध

d. गवाह के विरुद्ध

 

73. उपधारणा कब तक लागू रहती है?

a. जब तक अदालत ख़ुद समाप्त करे

b. जब तक अभियुक्त इसे प्रतिकूल सिद्ध कर दे

c. मामले के अंत तक स्वतः

d. केवल आरोप तय होने तक

 

74. धारा 20 की उपधारणा किस आधार पर लगती है?

a. संदेह

b. प्रमाण कि अभियुक्त ने असम्यक लाभ स्वीकार किया या स्वीकार करने का प्रयत्न किया

c. केवल शिकायतकर्ता के बयान पर

d. केवल जांच रिपोर्ट पर

 

75. यदि लोक सेवक असम्यक लाभ किसी अन्य व्यक्ति के लिए लेता है, तो क्या धारा 20 लागू होती है?

a. हाँ

b. नहीं

c. केवल धारा 7 में

d. केवल धारा 11 में

 

76. धारा 20 के अनुसार असम्यक लाभ किस प्रकार लिए जाने पर उपधारणा लागू होगी?

a. बिना प्रतिफल के

b. ऐसे प्रतिफल के लिए जो धारा 11 के अनुसार अपर्याप्त हो

c. दोनों A और B

d. केवल लिखित प्रतिफल होने पर

 

77. धारा 20 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

a. आरोपी की सहायता करना

b. भ्रष्टाचार मामलों में प्रमाण का भार आरोपी पर स्थानांतरित करना

c. गवाहों को सुरक्षित करना

d. न्यायालय की प्रक्रिया सरल बनाना

 

78. धारा 20 किस लोक कर्तव्य से संबंधित है?

a. उचित रूप से किया गया कार्य

b. अनुचित या बेईमानी से किए जाने वाले कार्य

c. अदालत का कार्य

d. निजी कार्य

 

79. यदि अभियुक्त यह सिद्ध कर दे कि असम्यक लाभ वैध कारण से लिया गया था, तो

a. उपधारणा बनी रहती है

b. उपधारणा समाप्त हो जाती है

c. दंड स्वतः लग जाता है

d. मामला स्वतः समाप्त होता है

 

80. अभियुक्त व्यक्ति का सक्षम साक्षी होना, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 21

b. धारा 22

c. धारा 23

d. धारा 24

 

81. इस अधिनियम के तहत दण्डनीय अपराध से आरोपित व्यक्ति किस पक्ष के लिए साक्षी बन सकता है?

a. केवल अभियोजन पक्ष

b. केवल प्रतिरक्षा पक्ष

c. दोनों पक्ष

d. केवल न्यायाधीश की अनुमति से

 

82. अभियुक्त को साक्षी के रूप में बुलाया जा सकता है:

a. अदालत की मर्जी पर

b. अभियोजन पक्ष की इच्छा पर

c. उसकी स्वयं की प्रार्थना पर

d. पुलिस की सिफारिश पर

 

83. अभियुक्त साक्ष्य देने में असफल रहता है तो परिणाम क्या होगा?

a. अदालत उसे दंडित करेगी

b. अभियोजन पक्ष टीका-टिप्पणी करेगा

c. कोई टीका-टिप्पणी नहीं होगी

d. उसके खिलाफ अतिरिक्त आरोप लगाए जाएंगे

 

84. अभियुक्त से कौन सा प्रश्न नहीं पूछा जा सकता?

a. जिस अपराध का उस पर आरोप है

b. पहले का सिद्धदोष अपराध

c. उसके अच्छे चरित्र के बारे में

d. प्रतिरक्षा के लिए पूछे गए प्रश्न

 

85. अभियुक्त अपने प्लीडर द्वारा अच्छे चरित्र का साक्ष्य देता है, तो अभियोजन पक्ष क्या कर सकता है?

a. चरित्र पर टीका-टिप्पणी कर सकता है

b. चरित्र पर प्रश्न पूछ सकता है

c. लांछन डाल नहीं सकता

d. उसे दंडित कर सकता है

 

86. अपराध जो अभियुक्त पर पहले सिद्धदोष हो चुका है, उसे साक्षी के रूप में पूछे जाने वाले प्रश्न में शामिल किया जा सकता है यदि:

a. वह नए अपराध का सबूत हो

b. प्रतिरक्षा पक्ष का प्रश्न हो

c. यह केवल चरित्र पर प्रश्न के लिए हो

d. इसे कभी नहीं पूछा जा सकता

 

87. अभियुक्त का साक्ष्य किस उद्देश्य के लिए लिया जा सकता है?

a. अपने खिलाफ आरोप सिद्ध करने के लिए

b. प्रतिरक्षा पक्ष के लिए

c. केवल अदालत के आदेश पर

d. अभियोजन पक्ष के लाभ के लिए

 

88. यदि अभियुक्त ने अन्य आरोपी के खिलाफ साक्ष्य दिया है, तो:

a. उसे दंडित किया जा सकता है

b. उसके खिलाफ अतिरिक्त आरोप नहीं लगाए जाएंगे

c. अभियोजन पक्ष उसका चरित्र लांछित कर सकता है

d. अदालत उसे दोषी ठहरा सकती है

 

89. धारा 21 के अनुसार, अभियुक्त से वह प्रश्न पूछा जा सकता है जो:

a. केवल उसके अच्छे चरित्र को दर्शाए

b. प्रतिरक्षा के स्वरूप या संचालन से संबंधित हो

c. उसके पहले अपराध का दोष सिद्ध करे

d. उसके विरोधी पक्ष के लिए हानिकारक हो

 

90. अभियुक्त को साक्ष्य देने के लिए बुलाने में मुख्य शर्त क्या है?

a. अभियोजन पक्ष की अनुमति

b. अदालत का आदेश

c. अभियुक्त की प्रार्थना

d. पुलिस की सिफारिश

 

91. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) का कुछ उपान्तरणों के अध्यधीन लागू होना, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 21

b. धारा 22

c. धारा 23

d. धारा 24

 

92. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 243 की उपधारा (1) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 266 की उपधारा (1)) में संशोधन के अनुसार अभियुक्त से क्या अपेक्षा की जाएगी?

a. केवल अपने वकील को सूचित करना

b. तुरन्त या न्यायालय द्वारा अनुज्ञात समय में अपने साक्षियों और दस्तावेजों की लिखित सूची देना

c. अभियोजन पक्ष को दस्तावेज दिखाना

d. न्यायालय की अनुमति के बिना कार्यवाही स्थगित करना

 

93. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 309 की उपधारा (1) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 346) की उपधारा (1) में नया परन्तुक जोड़ने का उद्देश्य क्या है?

a. न्यायालय को कार्यवाही स्थगित करने का अधिकार देना

b. कार्यवाही केवल अभियोजन पक्ष के आवेदन पर स्थगित करने का प्रावधान देना

c. कार्यवाही किसी पक्षकार के आवेदन मात्र पर स्थगित या मुल्तवी हो

d. अभियुक्त के प्लीडर को बाधित करना

 

94. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 317 उपधारा (3) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 282 उपधारा (3) के अनुसार न्यायाधीश कब अभियुक्त की अनुपस्थिति में विचारण कर सकता है?

a. केवल अभियोजन पक्ष की अनुमति मिलने पर

b. जब न्यायाधीश ठीक समझता है और कारण लेखबद्ध करता है

c. किसी भी स्थिति में बिना कारण

d. केवल यदि अभियुक्त ने अनुमति दी हो

 

95. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 317 उपधारा (3) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 282 उपधारा (3) के अनुसार अभियुक्त का कौन सा अधिकार सुरक्षित रहेगा?

a. न्यायालय को अभिलेख दिखाने का अधिकार

b. पुनः साक्षी को बुलाने का अधिकार

c. अभियोजन पक्ष के साक्ष्य अस्वीकार करने का अधिकार

d. न्यायाधीश के निर्णय को चुनौती देने का अधिकार

 

96. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 397 उपधारा (1) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 438 उपधारा (1) में जो नया परन्तुक जोड़ा गया है, उसका उद्देश्य क्या है?

a. न्यायालय को अभिलेख मामूली तौर पर अनावश्यक रूप से मंगाने की शक्ति देना

b. अभियुक्त को अभिलेख मंगाने का अधिकार रोकना

c. कार्यवाही स्थगित करने का अधिकार देना

d. केवल प्रमाणित प्रतियों का प्रयोग करने का निर्देश देना

 

97. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 397 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 438) के अनुसार न्यायालय किन परिस्थितियों में अभिलेख की परीक्षा प्रमाणित प्रतियों से कर सकता है?

a. जब अभियोजन पक्ष का आवेदन हो

b. जब अभियुक्त अनुपस्थित हो

c. जब न्यायालय यह समाधान कर ले कि अभिलेख की परीक्षा प्रमाणित प्रतियों से की जा सकती है

d. जब सभी पक्षकार उपस्थित हों

 

98. धारा 22 के अनुसार, किस धारा में यह स्पष्ट किया गया कि कार्यवाही किसी पक्षकार के आवेदन मात्र पर स्थगित नहीं होगी?

a. धारा 243

b. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 309 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 346)

c. धारा 317

d. धारा 397

 

99. धारा 22 के अनुसार, न्यायाधीश अपने कारण लिखकर किसी साक्षी का साक्ष्य किस स्थिति में ले सकता है?

a. केवल अभियुक्त की उपस्थिति में

b. अभियुक्त या उसके प्लीडर की अनुपस्थिति में, पुनः साक्षी बुलाने के अधिकार के अधीन

c. बिना किसी लिखित कारण के

d. केवल अभियोजन पक्ष की अनुमति मिलने पर

 

100. धारा 13(1)() के अधीन अपराध के संबंध में आरोप की विशिष्टियां, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 22

b. धारा 23

c. धारा 24

d. धारा 25

 

101. धारा 23 के अनुसार, धारा 13(1)() के तहत आरोप में किसकी विशिष्टता आवश्यक नहीं है?

a. संबंधित सम्पत्ति का वर्णन

b. अपराध की निश्चित तारीखें या विशिष्ट मदें

c. अपराध का प्रकार

d. प्रथम और अंतिम तारीख

 

102. धारा 23 के अनुसार, आरोप में सम्पत्ति का वर्णन किस प्रकार होना चाहिए?

a. संक्षिप्त और पर्याप्त रूप से, बिना विशिष्ट मदों के

b. सभी दस्तावेजों के साथ पूर्ण विवरण सहित

c. केवल मूल्य का उल्लेख करके

d. किसी भी प्रकार का वर्णन आवश्यक नहीं

 

103. धारा 23 में आरोप की तारीखों के संबंध में अधिकतम अवधि क्या है?

a. 6 महीने

b. 1 वर्ष

c. 2 वर्ष

d. कोई सीमा नहीं

 

104. यदि आरोप में तारीखों की विशिष्टता नहीं है, तो वह किस धारा के अर्थ में अपराध का आरोप माना जाएगा?

a. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 13

b. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 219 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 242) 

c. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 307

d. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 243

 

105. धारा 23 के अनुसार, आरोप में किन बातों का वर्णन पर्याप्त होगा?

a. अपराध की सम्पत्ति और संबंधित अवधि

b. अपराध के सभी साक्ष्यों का विवरण

c. अभियुक्त की पूरी जीवनी

d. न्यायालय की सभी प्रक्रियाओं का विवरण

 

106. धारा 23 के अनुसार, आरोप में तारीखों को किस प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता है?

a. विशिष्ट तारीखों या निश्चित मदों के बिना

b. केवल सटीक तारीखें देने के साथ

c. महीने और वर्ष के विवरण के साथ

d. कोई तारीख देने की आवश्यकता नहीं

 

107. यदि प्रथम और अंतिम तारीख के बीच का समय एक वर्ष से अधिक हो जाता है, तो क्या होगा?

a. आरोप मान्य रहेगा

b. आरोप धारा 13(1)() के तहत असंगत माना जाएगा

c. अभियुक्त को दोषमुक्त किया जाएगा

d. न्यायालय स्वतः कार्यवाही स्थगित करेगा

 

108. धारा 23 के अनुसार, आरोप में सम्पत्ति और अवधि का वर्णन करना आवश्यक है?

a. हाँ, यह पर्याप्त होना चाहिए

b. नहीं, केवल अभियुक्त का नाम पर्याप्त है

c. केवल तारीखों का उल्लेख पर्याप्त है

d. केवल अपराध का प्रकार पर्याप्त है

 

109. धारा 23 के अनुसार, आरोप की अवधि का अधिकतम समय क्या है?

a. 6 महीने

b. 1 वर्ष

c. 2 वर्ष

d. कोई सीमा नहीं

 

110. धारा 23 के अनुसार, धारा 13(1)() के तहत आरोप की क्या विशेषता है?

a. आरोप में सम्पत्ति और समयावधि का संक्षिप्त वर्णन पर्याप्त है

b. प्रत्येक साक्षी का पूरा विवरण देना आवश्यक है

c. प्रत्येक मद का मूल्य देना आवश्यक है

d. अभियुक्त का निवास स्थान देना आवश्यक है

 

111. सेना, नौसेना और वायुसेना सम्बन्धी या अन्य विधियों का प्रभावित नहीं होगा, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 23

b. धारा 24

c. धारा 25

d. धारा 26

 

112. धारा 25 के अनुसार, इस अधिनियम की कोई बात किन विधियों के अधिकारिता या प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करेगी?

a. केवल सेना अधिनियम, 1950

b. सेना अधिनियम, 1950; वायु सेना अधिनियम, 1950; नौसेना अधिनियम, 1957; सीमा सुरक्षा बल अधिनियम, 1968; तटरक्षक अधिनियम, 1978; राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1986

c. केवल राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1986

d. केवल सीमा सुरक्षा बल अधिनियम, 1968 और तटरक्षक अधिनियम, 1978

 

113. धारा 25 के अनुसार, यह अधिनियम किन बातों को प्रभावित नहीं करेगा?

a. न्यायालय द्वारा प्रयुक्त अधिकारिता

b. लागू होने वाली प्रक्रिया

c. दोनों (A और B)

d. केवल सैनिकों के प्रशिक्षण संबंधी आदेश

 

114. धारा 25 के अनुसार, शंकाओं के निराकरण के लिए क्या घोषित किया गया है?

a. कि विशेष न्यायाधीश का न्यायालय सामान्य दाण्डिक न्यायालय समझा जाएगा

b. कि सभी सैन्य अदालतें इस अधिनियम के अधीन होंगी

c. कि सैनिकों पर सामान्य दण्ड प्रक्रिया लागू होगी

d. कि कोई विशेष नियम नहीं है

 

115. धारा 25 के अनुसार, क्या सीमा सुरक्षा बल अधिनियम, 1968 के न्यायालय पर इस अधिनियम का प्रभाव होगा?

a. हाँ, पूरी तरह प्रभावी होगा

b. नहीं, प्रभावित नहीं होगा

c. केवल सैनिक अभियुक्तों के मामले में प्रभावी होगा

d. केवल राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में प्रभावी होगा

 

116. धारा 25 के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन सा न्यायालय इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ विशेष न्यायाधीश का न्यायालय समझा जाएगा?

a. सामान्य दाण्डिक न्यायालय

b. सैन्य न्यायालय

c. उच्च न्यायालय

d. सुप्रीम कोर्ट

 

117. धारा 25 के अनुसार, क्या तटरक्षक अधिनियम, 1978 के प्राधिकार इस अधिनियम से प्रभावित होंगे?

a. हाँ

b. नहीं

c. केवल विशेष परिस्थितियों में

d. केवल अभियोजन पक्ष की अनुमति से

 

118. धारा 25 के अनुसार, किन अधिनियमों के न्यायालयों पर इस अधिनियम का कोई प्रभाव नहीं होगा?

a. सेना अधिनियम और वायु सेना अधिनियम

b. नौसेना अधिनियम और सीमा सुरक्षा बल अधिनियम

c. तटरक्षक अधिनियम और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम

d. सभी उपर्युक्त

 

119. धारा 25 के अनुसार, यह अधिनियम किस प्रकार के न्यायालय की प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करेगा?

a. सामान्य दाण्डिक न्यायालय

b. विशेष न्यायाधीश का न्यायालय

c. सैन्य या सुरक्षा बल के न्यायालय

d. उच्च न्यायालय

 

120. धारा 25 के अनुसार, शंकाओं के निराकरण में विशेष न्यायाधीश का न्यायालय किस न्यायालय के रूप में माना जाएगा?

a. सामान्य दाण्डिक न्यायालय

b. उच्च न्यायालय

c. सुप्रीम कोर्ट

d. सैन्य न्यायालय

 

121. धारा 25 के अनुसार, क्या यह अधिनियम सेना, वायु सेना या नौसेना के प्राधिकारों की अधिकारिता को प्रभावित करता है?

a. हाँ, पूर्ण रूप से

b. नहीं, प्रभावित नहीं करेगा

c. केवल अभियोजन के समय

d. केवल राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में

 

122. धारा 26 का मुख्य विषय क्या है?

a. विशेष न्यायालय की अपील प्रक्रिया

b. विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति

c. 1952 के अधिनियम 46 के अधीन नियुक्ति विशेष न्यायाधीशों का इस अधिनियम के अधीन नियुक्त विशेष न्यायाधीश होना

d. विशेष न्यायाधीशों की सेवा शर्तें

 

123. दण्ड विधि (संशोधन) अधिनियम, 1952 के अधीन नियुक्त विशेष न्यायाधीश को इस अधिनियम के अंतर्गत किस रूप में माना जाएगा?

a. सामान्य सत्र न्यायाधीश

b. अस्थायी न्यायाधीश

c. धारा 3 के अधीन नियुक्त विशेष न्यायाधीश

d. अपीलीय न्यायाधीश

 

124. धारा 26 के अनुसार, कौन-सा न्यायाधीश इस अधिनियम के प्रारम्भ पर पद धारण कर रहा होना चाहिए?

a. जिला एवं सत्र न्यायाधीश

b. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट

c. 1952 के अधिनियम के अधीन नियुक्त विशेष न्यायाधीश

d. उच्च न्यायालय का न्यायाधीश

 

125. ऐसे विशेष न्यायाधीश को किस क्षेत्र के लिए नियुक्त माना जाएगा?

a. सम्पूर्ण राज्य के लिए

b. केन्द्रीय सरकार द्वारा बाद में निर्धारित क्षेत्र

c. वही क्षेत्र या क्षेत्र जिनके लिए वह पहले नियुक्त था

d. केवल जिला मुख्यालय के लिए

 

126. अधिनियम के प्रारम्भ के समय विशेष न्यायाधीश के समक्ष लंबित कार्यवाहियों का निपटारा किस प्रकार किया जाएगा?

a. कार्यवाहियाँ स्वतः समाप्त हो जाएँगी

b. उच्च न्यायालय को स्थानांतरित कर दी जाएँगी

c. नए सिरे से सुनवाई की जाएगी

d. इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार निपटारा किया जाएगा

 

127. धारा 26 का उद्देश्य मुख्यतः किस सिद्धांत को सुनिश्चित करता है?

a. न्यायिक पदोन्नति

b. न्यायिक निरन्तरता

c. प्रशासनिक नियंत्रण

d. अपीलीय पर्यवेक्षण

 

128. धारा 26 के अंतर्गत विशेष न्यायाधीश की मान्यता किस समय से प्रभावी मानी जाती है?

a. नियुक्ति आदेश की तिथि से

b. कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से

c. अधिनियम के प्रारम्भ से

d. अधिसूचना जारी होने की तिथि से

 

129. धारा 26 में संदर्भित1952 का अधिनियमकिस अधिनियम से संबंधित है?

a. भारतीय दण्ड संहिता, 1860

b. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973

c. दण्ड विधि (संशोधन) अधिनियम, 1952

d. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

 

130. धारा 27 किस विषय से संबंधित है?

a. विशेष न्यायाधीश की नियुक्ति

b. अपील और पुनरीक्षण

c. विशेष लोक अभियोजक

d. विचारण की प्रक्रिया

 

131. धारा 27 के अनुसार, अपील और पुनरीक्षण की शक्तियाँ किस न्यायालय द्वारा प्रयोग की जाती हैं?

a. सत्र न्यायालय

b. विशेष न्यायाधीश

c. उच्च न्यायालय

d. सर्वोच्च न्यायालय

 

132. उच्च न्यायालय धारा 27 के अंतर्गत किस विधि के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करता है?

a. भारतीय दण्ड संहिता, 1860

b. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

c. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023)

d. संविधान, 1950

 

133. धारा 27 के अनुसार, विशेष न्यायाधीश को किस न्यायालय के समान माना गया है?

a. मजिस्ट्रेट न्यायालय

b. उच्च न्यायालय

c. सत्र न्यायालय

d. सर्वोच्च न्यायालय

 

134. विशेष न्यायाधीश को सत्र न्यायालय किस संदर्भ में माना गया है?

a. दण्डादेश देने के लिए

b. क्षेत्राधिकार के निर्धारण के लिए

c. अपील और पुनरीक्षण की शक्तियों के प्रयोग के लिए

d. अभियोजन की स्वीकृति के लिए

 

135. धारा 27 में विशेष न्यायाधीश के विचारण को किस क्षेत्र से जोड़ा गया है?

a. सम्पूर्ण भारत

b. राज्य की सीमाएँ

c. उच्च न्यायालय की स्थानीय सीमाएँ

d. जिला क्षेत्र

 

136. धारा 27 के अंतर्गत उच्च न्यायालय की शक्तियाँ किस सीमा तक प्रयोग की जा सकती हैं?

a. बिना किसी सीमा के

b. केवल अपील तक

c. केवल पुनरीक्षण तक

d. जहां तक वे लागू हो सकती हैं

 

137. धारा 27 का मुख्य विधिक प्रभाव क्या है?

a. विशेष न्यायाधीश को उच्च न्यायालय के अधीन करना

b. अपीलीय मंच को समाप्त करना

c. विशेष न्यायाधीश के निर्णयों पर अपील एवं पुनरीक्षण का मार्ग उपलब्ध कराना

d. विशेष न्यायाधीश की शक्तियाँ सीमित करना

 

138. धारा 28 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

a. अन्य विधियों को निरस्त करना

b. इस अधिनियम को सर्वोपरि बनाना

c. अधिनियम का किसी अन्य विधि के अतिरिक्त होना

d. लोक सेवकों को संरक्षण देना      

 

139. धारा 28 के अनुसार, इस अधिनियम के उपबन्ध अन्य विधियों के साथ किस प्रकार लागू होंगे?

a. अन्य विधियों का अल्पीकरण करते हुए

b. अन्य विधियों को समाप्त करते हुए

c. अन्य विधियों के अतिरिक्त, कि उनका अल्पीकरण करते हुए

d. केवल विशेष परिस्थितियों में

 

140. “तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधिका क्या अभिप्राय है?

a. भविष्य में बनने वाली विधियाँ

b. केवल दण्ड प्रक्रिया संहिता

c. उस समय लागू सभी प्रचलित विधियाँ

d. केवल विशेष अधिनियम

 

141. धारा 28 के अनुसार, क्या यह अधिनियम किसी लोक सेवक को अन्य विधियों के अंतर्गत की जाने वाली कार्यवाही से छूट देता है?

a. हाँ, पूर्ण छूट देता है

b. केवल विभागीय कार्यवाही से

c. नहीं, कोई छूट नहीं देता

d. केवल न्यायालय की अनुमति से

 

142. यदि किसी लोक सेवक के विरुद्ध इस अधिनियम के अतिरिक्त किसी अन्य विधि के अंतर्गत कार्यवाही बनती है, तो क्या होगा?

a. केवल इस अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही होगी

b. अन्य विधि के अंतर्गत कार्यवाही वर्जित होगी

c. दोनों में से किसी एक के अंतर्गत कार्यवाही होगी

d. अन्य विधि के अंतर्गत कार्यवाही भी संस्थापित की जा सकती है

 

143. धारा 28 किस सिद्धांत को स्पष्ट करती है?

a. अध्यारोही प्रभाव (Overriding effect)

b. अतिरिक्त प्रभाव (Additional remedy)

c. प्रत्यायोजन का सिद्धांत

d. दायित्वहीनता का सिद्धांत

 

144. धारा 28 के अंतर्गतअल्पीकरणशब्द का क्या अर्थ है?

a. अधिकारों का विस्तार

b. विधि का पूर्ण निरसन

c. किसी विधि की शक्ति को कम करना

d. नई विधि का निर्माण

 

145. धारा 28 के अनुसार, इस अधिनियम की प्रकृति कैसी है?

a. अन्य विधियों का स्थान लेने वाली

b. अन्य विधियों को समाप्त करने वाली

c. अन्य विधियों के पूरक के रूप में

d. केवल अस्थायी

 

146. धारा 29 के अंतर्गत किस विधि में संशोधन किया गया है?

a. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988

b. दण्ड विधि (संशोधन) अधिनियम, 1952

c. दण्ड विधि (संशोधन) अध्यादेश, 1944

d. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973

 

147. धारा 29 के अनुसार किन उपधाराओं/खंडों मेंराज्य सरकारके स्थान परराज्य सरकार या केन्द्रीय सरकारशब्द रखे गए हैं?

a. केवल धारा 2 की उपधारा (1)

b. धारा 2(1), धारा 9(1), धारा 10(), धारा 11(1) और धारा 13(1)

c. केवल धारा 10 और धारा 11

d. सम्पूर्ण अध्यादेश में

 

148. धारा 10 के खण्ड () मेंतीन मासके स्थान पर कौन-सा शब्द रखा गया है?

a. छह मास

b. नौ मास

c. एक वर्ष

d. दो वर्ष

 

149. धारा 29 के अनुसार अनुसूची के किस पैरा का लोप किया गया है?

a. पैरा 2

b. पैरा 3

c. पैरा 1

d. पैरा 4

 

150. अनुसूची के पैरा 2 और पैरा 4 मेंस्थानीय प्राधिकरणके पश्चात् किन शब्दों का अन्तःस्थापन किया गया है?

a. केवल केन्द्रीय सरकार

b. केवल राज्य सरकार

c. केन्द्रीय, प्रांतीय या राज्य अधिनियम द्वारा स्थापित प्राधिकरण, निगम, निकाय, सरकारी कम्पनी या सहायता प्राप्त सोसाइटी से संबंधित विस्तृत शब्द

d. केवल कम्पनी अधिनियम, 1956

 

151. अनुसूची के पैरा 4 के स्थान पर कौन-सा नया पैरा प्रतिस्थापित किया गया है?

a. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1947 के अधीन अपराध

b. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1952 के अधीन अपराध

c. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अधीन दण्डनीय अपराध

d. लोक सेवकों से संबंधित अपराध

 

152. पैरा 8 में किन मदों का विस्तार किया गया है?

a. मद 1 और मद 2

b. मद 2, मद 3 और मद 4

c. मद 2, मद 3, मद 4 और मद 4-

d. केवल मद 4-

 

153. धारा 29 में किए गए संशोधनों का मुख्य उद्देश्य क्या है?

a. दण्ड प्रक्रिया को समाप्त करना

b. केन्द्र और राज्य सरकार दोनों को समान अधिकार देना तथा दायरे का विस्तार करना

c. केवल राज्य सरकार की शक्तियाँ सीमित करना

d. अनुसूची को निरस्त करना

 

154. नियम बनाने की शक्ति, किस धारा में परिभाषित हैं?

a. धारा 28

b. धारा 28()

c. धारा 29

d. धारा 29()

 

155. धारा 29() के अंतर्गत नियम बनाने की शक्ति किसे प्रदान की गई है?

a. राज्य सरकार

b. उच्च न्यायालय

c. केन्द्रीय सरकार

d. संसद

 

156. धारा 29()(1) के अनुसार नियम किस माध्यम से बनाए जाएंगे?

a. कार्यपालिका आदेश द्वारा

b. संसद के अधिनियम द्वारा

c. राजपत्र में अधिसूचना द्वारा

d. न्यायिक निर्देश द्वारा

 

157. नियम बनाने की शक्ति का प्रयोग किस उद्देश्य से किया जाएगा?

a. दण्ड निर्धारित करने के लिए

b. अधिनियम के उपबन्धों को क्रियान्वित करने के लिए

c. अपील की प्रक्रिया तय करने के लिए

d. न्यायालयों के गठन के लिए

 

158. धारा 29()(2) के अनुसार, नियम बनाने की शक्ति किस प्रकार की है?

a. सीमित और प्रतिबंधित

b. केवल निर्दिष्ट विषयों तक सीमित

c. विशिष्टतया उल्लेखित विषयों सहित व्यापक

d. केवल संसद की अनुमति से

 

159. धारा 29()(2)() के अंतर्गत किन विषयों पर नियम बनाए जा सकते हैं?

a. विशेष न्यायालय की प्रक्रिया

b. धारा 9 के अधीन वाणिज्यिक संगठन द्वारा बनाए जाने वाले मार्गदर्शक सिद्धान्त

c. दण्ड प्रक्रिया संहिता के उपबंध

d. अपील की समय-सीमा

 

160. अभियोजन की मंजूरी से संबंधित मार्गदर्शक सिद्धांत किस धारा के अंतर्गत नियमों द्वारा निर्धारित किए जा सकते हैं?

a. धारा 17

b. धारा 18

c. धारा 19 की उपधारा (1)

d. धारा 21

 

161. धारा 29()(3) के अनुसार, बनाए गए प्रत्येक नियम को संसद के समक्ष कितनी अवधि के लिए रखा जाएगा?

a. पंद्रह दिन

b. तीस दिन

c. साठ दिन

d. नब्बे दिन

 

162. नियम को संसद के समक्ष रखने की अवधि किस प्रकार पूरी की जा सकती है?

a. केवल एक ही सत्र में

b. केवल दो सत्रों में

c. एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में

d. केवल विशेष सत्र में

 

163. यदि दोनों सदन नियम में परिवर्तन के लिए सहमत हो जाएँ, तो उस नियम का क्या होगा?

a. वह पूर्णतः निरस्त हो जाएगा

b. वह यथावत लागू रहेगा

c. वह परिवर्तित रूप में प्रभावी होगा

d. उसे पुनः अधिसूचित करना होगा

 

164. यदि दोनों सदन यह सहमत हो जाएँ कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो क्या परिणाम होगा?

a. नियम अस्थायी रूप से स्थगित होगा

b. नियम निष्प्रभाव हो जाएगा

c. नियम उच्च न्यायालय भेजा जाएगा

d. नियम स्वतः संशोधित हो जाएगा

 

165. नियम के परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से पहले उसके अधीन की गई कार्यवाही पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

a. वे सभी कार्यवाहियाँ अवैध हो जाएँगी

b. केवल कुछ कार्यवाहियाँ वैध रहेंगी

c. पहले की गई बातों की विधिमान्यता प्रभावित नहीं होगी

d. पुनः अनुमोदन आवश्यक होगा

 

166. धारा 30 का मुख्य विषय क्या है?

a. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव

b. नियम बनाने की शक्ति

c. निरसन और व्यावृत्ति

d. अपील और पुनरीक्षण

 

167. धारा 30(1) के अंतर्गत कौन-कौन से अधिनियम निरसित किए गए हैं?

a. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973

b. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1947 और दण्ड विधि संशोधन अधिनियम, 1952

c. भारतीय दण्ड संहिता, 1860 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

d. दण्ड विधि (संशोधन) अध्यादेश, 1944

 

168. धारा 30(2) में किस अधिनियम की धारा 6 का उल्लेख किया गया है?

a. भारतीय दण्ड संहिता, 1860

b. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973

c. साधारण खण्ड अधिनियम, 1897

d. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988

 

169. निरसन के बावजूद पूर्व अधिनियमों के अधीन की गई कार्यवाहियों के संबंध में धारा 30(2) का क्या प्रभाव है?

a. सभी पूर्व कार्यवाहियाँ स्वतः समाप्त हो जाती हैं

b. सभी कार्यवाहियाँ अवैध हो जाती हैं

c. जो कार्यवाहियाँ इस अधिनियम से असंगत नहीं हैं, वे मान्य मानी जाएँगी

d. सभी मामलों में पुनः कार्यवाही आवश्यक होगी

 

170. धारा 30(2) के अनुसार, निरसित अधिनियमों के अधीन की गई कार्रवाई को किस प्रकार माना जाएगा?

a. शून्य और अमान्य

b. केवल अस्थायी रूप से वैध

c. इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन की गई कार्रवाई के रूप में

d. केवल न्यायालय की स्वीकृति से वैध

 

171. “तत्स्थानी उपबन्धका तात्पर्य क्या है?

a. पूर्व अधिनियम के समान उपबन्ध

b. भविष्य में बनाए जाने वाले उपबन्ध

c. इस अधिनियम के समकक्ष या प्रतिस्थापक उपबन्ध

d. केवल प्रक्रियात्मक उपबन्ध

 

172. धारा 30(2) किस सिद्धांत को संरक्षित करती है?

a. पूर्वव्यापी दण्ड का सिद्धांत

b. विधिक निरन्तरता का सिद्धांत

c. अध्यारोही प्रभाव का सिद्धांत

d. पूर्ण निरसन का सिद्धांत

 

173. यदि पूर्व अधिनियम के अधीन की गई कोई कार्रवाई इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत है, तो उसका क्या परिणाम होगा?

a. वह स्वतः वैध मानी जाएगी

b. वह इस अधिनियम के अंतर्गत समायोजित की जाएगी

c. उसे मान्यता नहीं मिलेगी

d. उसे संसद द्वारा अनुमोदित किया जाएगा

 

174. धारा 30 का व्यावहारिक प्रभाव क्या है?

a. सभी पुराने मामले समाप्त हो जाते हैं

b. सभी पुराने अधिनियम पूर्णतः अप्रासंगिक हो जाते हैं

c. पुराने अधिनियमों के अंतर्गत की गई वैध कार्यवाहियों की निरन्तरता बनी रहती है

d. केवल नए मामलों पर अधिनियम लागू होता है

 

175. धारा 31 का मुख्य विषय क्या है?

a. दण्ड प्रक्रिया का संशोधन

b. भारतीय दण्ड संहिता की कुछ धाराओं का लोप

c. अपील की व्यवस्था

d. नियम बनाने की शक्ति

 

176. धारा 31 के अनुसार भारतीय दण्ड संहिता की कौन-सी धाराएँ लोप की गई हैं?

a. धारा 120-A से 120-B

b. धारा 107 से 109

c. धारा 161 से धारा 165- तक

d. धारा 300 से 304

 

177. धारा 31 के अंतर्गत लोप की गई धाराएँ मूलतः किस अधिनियम का भाग थीं?

a. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973

b. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1947

c. भारतीय दण्ड संहिता, 1860

d. साधारण खण्ड अधिनियम, 1897

 

178. धारा 31 में किस अधिनियम की धारा 6 को लोप पर लागू किया गया है?

a. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973

b. भारतीय न्याय संहिता, 2023

c. साधारण खण्ड अधिनियम, 1897

d. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988

 

179. साधारण खण्ड अधिनियम, 1897 की धारा 6 को किस प्रकार लागू माना गया है?

a. जैसे यह लोप राज्य अधिनियम द्वारा किया गया हो

b. जैसे यह लोप न्यायिक आदेश द्वारा किया गया हो

c. जैसे यह लोप किसी केन्द्रीय अधिनियम द्वारा किया गया हो

d. जैसे यह लोप अस्थायी प्रकृति का हो

 

180. धारा 31 के अनुसार लोप का विधिक प्रभाव क्या है?

a. सभी पूर्व कार्यवाहियाँ स्वतः समाप्त हो जाती हैं

b. सभी पूर्व अपराध निरस्त हो जाते हैं

c. साधारण खण्ड अधिनियम की धारा 6 के अनुसार विधिक निरन्तरता बनी रहती है

d. केवल नए मामलों पर ही कानून लागू होगा

 

181. धारा 31 का व्यावहारिक उद्देश्य क्या है?

a. भ्रष्टाचार संबंधी अपराधों को समाप्त करना

b. दण्ड संहिताओं के बीच दोहराव को समाप्त करना

c. अपीलीय अधिकारों का विस्तार करना

d. विशेष न्यायालयों की स्थापना करना

Download PDF